वैदिक काल से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न तथा विस्तार से वर्णन –

                         वैदिक काल
                  (1500 ई. पू – 600 ई. पू)

👉 वैदिक साहित्य के अंग – वेद, ब्राह्मण,  आरण्यक और उपनिषद।
👉 वेदांग धर्मशास्त्र महाकाव्य पुराण स्मृतियां वैदिक साहित्य का अंग नहीं है।

वेद
👉 वेद शब्द ‘विद्’  धातु से बना है, जिसका अर्थ है ‘जानना’ या ‘ज्ञान’  ।

👉वेदों को श्रुति साहित्य भी कहा जाता है। आर्यों को लिपि का ज्ञान नहीं था। इसलिए वे वेदों को सुनकर याद करते थे।

👉 वेदों की रचना करने वाले को ‘दृष्टा’ कहते थे।

👉 वेदों का संकलन वेदव्यास ने किया था।

👉 वेदों को नित्य एवं अपौरूषेय माना जाता हैं। अपौरूषेय अर्थात् वेदों की रचना पुरूष द्वारा न होकर देवताओं द्वारा हुई हैं।

👉 वेदों की कुल संख्या 4 है। ऋग्वेद,  यजुर्वेद,  सामवेद व अथर्ववेद

👉 ऋग्वेद, यजुर्वेद व सामवेद को “वेदत्रयी”  कहते हैं।

                                 (1) ऋग्वेद

👉 इसमें 10 मंडल 1028 सूक्त तथा 10552 श्लोक हैं।

👉 ऋग्वेद का पहला व दसवां मंडल सबसे बाद में जोड़ा (1 व 10 सबसे नये) गया। 2 से लेकर 7 मंडल सबसे प्राचीन है।

👉 तीसरे मंडल में देवी सूक्त मिलता है। इसमें गायत्री मंत्र का उल्लेख है। गायत्री मंत्र माता सावित्री को समर्पित है। गायत्री मंत्र की रचना विश्वामित्र द्वारा की गई थी। गायत्री मंत्र सूर्य देवता को भी समर्पित है।

👉 ऋग्वेद के सातवें मंडल में “दशराज्ञ युद्ध” का उल्लेख मिलता है। भरत कबीला एवं 10 राजाओं के मध्य यह युद्ध रावी नदी के तट पर हुआ था। भरत कबीला का प्रमुख सुदास था। सुदास ने विश्वामित्र को हटाकर वशिष्ठ को अपना प्रधान पुरोहित बनाया। इस युद्ध का मुख्य कारण रावी (परुष्णी)  नदी के जल पर अधिकार को लेकर हुआ। इस युद्ध में 10 राजाओं को पराजय का सामना करना पड़ा।

👉 ऋग्वेद का नौवां मंडल सोम देवता को समर्पित है।

👉 ऋग्वेद के दसवें मंडल में निर्गुण भक्ति तथा नदी सूक्त का उल्लेख मिलता है।

👉 ऋग्वेद सबसे प्राचीन एवं सर्वाधिक महत्वपूर्ण वेद है।

👉 ऋग्वेद के मंत्र पढ़ने वाले को ‘होतृ’ कहा जाता है।

👉 पाणिनी अपनी अष्टाध्यायी में ऋग्वेद की 21 शाखाएं बतलाते हैं।

                        (2) यजुर्वेद

👉 यजू अर्थ अर्थ – सूत्रों का वेद।

👉 यजुर्वेद में यज्ञ अनुष्ठानों (मंत्र, नियम व विधियां) की जानकारी मिलती है।

👉 यह वेद दो भागों में बंटा हुआ है – (1) शुक्ल यजुर्वेद
                                                 (2) कृष्ण यजुर्वेद

👉 सर्वप्रथम राजसूय एवं वाजपेय यज्ञों का उल्लेख इसी वेद में मिलता है।

👉 कृष्ण यजुर्वेद,  शुक्ल यजुर्वेद (नवीन) से अधिक प्राचीन है।

👉 कृष्ण यजुर्वेद की 4 संहिताएं – काठक, कपिष्ठल, मैत्रयानी एवं तैत्तिरीय संहिता।

👉 शुक्ल यजुर्वेद में केवल एक संहिता है – वाजसनेयी संहिता। शुक्ल यजुर्वेद की दो शाखाएं – (1) काण्व  (2) माध्यन्दिनी।

👉 ईशोपनिषद यजुर्वेद का अंतिम भाग है जिसका संबंध आध्यात्मिक चिंतन से है न की यज्ञ अनुष्ठान से।

👉 यह एकमात्र ऐसा वेद है जो गद्य एवं पद्य दोनों भागों में लिखा गया है।

👉 इस वेद के मंत्र पढ़ने वाले को “अध्वर्यू” कहा जाता हैं।

👉 शून्य का उल्लेख इसी वेद में मिलता है।

                             (3) सामवेद

👉 सामवेद नाम ‘समन’ शब्द से उत्पन्न हुआ है जिसका अर्थ है गीत/संगीत।

👉 इस वेद को गान ग्रंथ भी कहते हैं। इस वेद में 1869 श्लोक हैं।

👉 भारतीय संगीत का जनक इसी वेद को माना जाता है अर्थ अर्थ इसी वेद से संगीत की उत्पत्ति मानी जाती है।

👉 भारतीय संगीत का सबसे प्राचीनतम ग्रंथ यही वेद है।

👉 इस वेद में सभी सभी मंत्र गाने के रूप में मिलते हैं जिन्हें सोम यज्ञ के समय उद्गाता पुरोहित गाता था।

👉 कौथुम, राणायनीय व जैमिनीय सोमवेद की तीन शाखाएं हैं।

👉 सामवेद के मंत्रों का उच्चारण करने वाले को ‘उद्गाता’ कहते है।

👉 इस वेद के मंत्र ऊंचे स्वर में गाए जाते थे। 

                   (4) अथर्ववेद

👉 इसकी दो शाखाएं मिलती है –  शौनक व पिप्पलाद।

👉 इस वेद में 20 अध्याय तथा 731 सुक्त एवं 6000 मंत्र है।
👉 चांदी का उल्लेख किस वेद में मिलता है।

👉 यह वेद अथर्व ऋषि तथा आंगीरस ऋषि द्वारा रचित है।

👉 इसलिए वेद का अन्य नाम – अथर्वआंगीरस वेद हैं।

👉 जादू टोने रोग,  निवारण,  शल्यक्रिया,  तंत्र मंत्र,  अंधविश्वासों,  शैतानों एवं बीमारियों को दूर करने वाले मंत्र छंद के रूप आदि का उल्लेख अथर्व वेद में मिलता है।

👉 इस वेद में मृत्यु लोक का देवता परीक्षित को बताया गया है।

👉 अथर्ववेद युद्ध वर्ग से संबंधित था।

👉 इस वेद में  ऋग्वैदिक संस्था ‘सभा एवं समिति’  को प्रजापति की दो पुत्रियां बताया गया है।

👉 अथर्व वेद के दो सूक्त दुंदुभि को समर्पित हैं। 



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