महाराजा सूरजमल का जीवन परिचय

     महाराजा सूरजमल का जीवन परिचय

  • सूरजमल में अच्छे शासक के सभी गुण देख उसके पिता बदनसिंह ने अपने जीते जी 1755 ई. में इसे भरतपुर के शासन बागडर संभला दी। इस समय इसके राज्य में भरतपुर, मथुरा, आगरा, मेरठ, अलोगढ़ आदि जागीरें शामिल थी बुद्धिमता एवं कुशलता व कूटनीति के धनी सूरजमल को ‘जाट जाति का प्लेटो ‘ ( जाटों का अफलातून ) कहा जाता है।
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  • महाराजा अपने समय में देश के शक्तिशालो राजाओं में शुमार होता था। डीग के प्रसिद्ध महलों का निर्माण सूरजमल के में करवाया गया।
  • आगरा पर अधिकार
    12 जून,1761 ई.को
    आगरा परम् सूरजमल का
    अधिकार एक गहरी
    भावुकता का अवसर था।
    लगभग नौ दशक पूर्व
    आगरा के किले के द्वार से
    कुछ ही दूर गोकुला के
    टुकड़े-टुकड़े करके फैंके
    गये थे सूरजमल ने उसका
    प्रतिशोध ले लिया था।
  • जयपुर में महाराजा सवाई जयसिंह के देहान्त के बाद उत्तराधिकार के मामले में सूरजमल ने सवाईं ईश्वरीसिंह का देकर जयपुर के सिंहासन पर उन्हें बिठाने में अहम भूमिका निभाई । इसने सन्‌ 1754 ई. में मराठा सरदार मल्हारराव होल्कर कुम्हेर पर किये गये आक्रमण को विफल कर दिया था।
  • 1761 ई. में अहमदशाह अब्दाली के मराठों के विरुद्ध युद्ध में ने मराठों की सहायता की तथा अब्दाली से हारने के बाद कई मराठाओं ने भरतपुर आकर ही शरण ली, जिन्हें अब्दाली सौंपने से इन्कार कर सूरजमल ने अपने अपूर्व साहस का परिचय दिया।
  • महाराजा सूरजमल के शासनकाल में जाट साप्राज्य चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया। सन्‌ 1763 ई. के अंत में इलाहाबाद के सूबेदार नजीबुद्दोला खाँ (नजीब खाँ रोहिला) से हुए युद्ध इसने पूरी ताकत से उसका मुकाबला किया तथा 15 जनवरी, 1764 ई. को किसी पठान सरदार के आक्रमण में महाराजा का देहान्त हो गया।
  • महाराजा सूरजमल के समय की जानकारी पुरोहित मंगलसिंह द्वारा रचित ग्रंथ ‘सुजान संबत * से प्राप्त होती है।
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