भारत सरकार अधिनियम (Act.) 1858 की विशेषताएं व कमियां।

1858 का भारत सरकार अधिनियम :-
➡️ प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी (company) का शासन (राज) समाप्त किया गया तथा संपूर्ण सत्ता ब्रिटिश राजमुकुट (ताज/क्राउन) के अंतर्गत आ गई इस अधिनियम को एक्ट फॉर दी गुड गवर्नमेंट ऑफ इंडिया /Act for the good government of india ( भारत की अच्छी सरकार बनाने के लिए बनाया गया अधिनियम ) कहते हैं। 
1858 का भारत शासन अधिनियम

➡️ इस अधिनियम में कहा गया कि भारत (india) का शासन ब्रिटेन (वर्तमान इंग्लैंड) की महारानी विक्टोरिया द्वारा चलाया जाएगा। 
➡️ भारत के गवर्नर जनरल को भारत का वायसराय एवं गवर्नर जनरल कहा जाने लगा। 
वायसराय भारत में ब्रिटिश ताज/क्राउन का सीधा प्रतिनिधि था। 
प्रथम वायसराय लार्ड कैनिंग था।
लॉर्ड कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर जनरल थे। 
➡️ बोर्ड ऑफ कंट्रोल तथा Court of Director समाप्त कर द्वैध शासन समाप्त कर दिया गया। 
➡️ एक नए/न्यू पद भारत का राज्य सचिव / भारत सचिव /भारत मंत्री  (secretary of state for india) का सृजन किया गया। 
➡️ संपूर्ण शासन एवं नियंत्रण का दायित्व भारत के राज्य सचिव को दिया गया जो कि ब्रिटिश कैबिनेट का एक सदस्य (one member) होता था। 
➡️ सर (sir) चार्ल्स वुड प्रथम भारत सचिव बने। 
➡️ भारत सचिव की सहायता (help) के लिए 15 सदस्यीय सलाहकार समिति बनाई गई। इस समिति में कुछ सदस्य ब्रिटिश क्राउन/ताज की ओर से मनोनीत (nomination) थे तथा कुछ का मनोनयन court of director की तरफ से था। 
इस सलाहकार समिति का अध्यक्ष भारत सचिव था। 
➡️ भारत सचिव भारतीय प्रशासन का संचालन वायसराय तथा अन्य पदाधिकारियों के माध्यम/द्वारा से करता था। 
➡️ 15 सदस्य सलाहकार समिति एक निगमित निकाल थी जिसे भारत एवं इंग्लैंड (india and england) में मुकदमे में एक पक्ष बनाने का अधिकार था अर्थात् यह समिति किसी पर भी मुकदमा कर सकती थी। इस समिति का ऑफिस ब्रिटेन में ही था। 
➡️ 1 नवंबर (november) 1858 को ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया द्वारा उद्घोषणा की गई जो इलाहाबाद में आयोजित दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़कर (बोलकर) सुनाई गई। इस उद्घोषणा द्वारा भारतीय देशी राजाओं के प्रति विलय की नीति (doctrine of lapse)  को समाप्त कर दिया गया। 
➡️ 1858 के कानून का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक मशीनरी में सुधार लाना था जिसके माध्यम से इंग्लैंड में भारतीय सरकार (indian goverment) की देखरेख और उसका नियंत्रण हो सकता था। इसने भारत में प्रचलित शासन प्रणाली में कोई विशेष परिवर्तन (बदलाव) नहीं किया। 
1858 के अधिनियम की कमियां :-
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➡️ यह अधिनियम केवल एकात्मक ही नहीं अपितु पूर्ण रूप से एकात्मक शासन अधिनियम था। संपूर्ण क्षेत्र का विभाजन प्रांतों में किया गया था जिसका मुखिया g. g था। गवर्नर जनरल की अपनी एक्जिक्यूटिव काउंसिल थी, किंतु यह सभी भारत सरकार के प्रतिनिधि/एजेंट मात्र थे तथा सारे कार्य (all work) वायसराय एवं गवर्नर जनरल (general) के आदेश से किए जाते थे।
➡️ विधायिका, कार्यपालिका अथवा नागरिक या सैन्य पर कोई विभाजन (डिवाइड) नहीं था। 
➡️ आम जनता की राय का किसी भी स्तर (लेवल) पर कोई महत्व नहीं था। 

gudar

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