भरतपुर जिला दर्शन (राजस्थान का प्रवेश द्वार व पूर्वी द्वार)

भरतपुर (राजस्थान का प्रवेश (दरवाजा) द्वार व पूर्वी द्वार)   

 भरतपुर शहर जाट महाराजा सूरजमल द्वारा सन 1733 में बसाया गया।  ईसा पूर्व 4_ 5 वीं सदी में भरतपुर – धौलपुर का क्षेत्र शूरसेन जनपद का हिस्सा था।  भरतपुर राजस्थान की पहली जाट रियासत थी,  जिसकी स्थापना जाट सरदार चुङामन ने औरंगजेब की मृत्यु के बाद के समय में थुन में दुर्ग बनाकर की थी।                           क्षेत्रफल 5066 वर्ग किलोमीटर             (1) इस जिले की सीमा उत्तर में मेवात जिला(हरियाणा),   पूर्व में मथुरा(U. P),  दक्षिण में धौलपुर व करौली तथा आगरा(U. P) तथा पश्चिम में दौसा व अलवर जिले से मिलती है।                               (2) यह राजस्थान का सातवा संभाग है तथा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(NCR) में शामिल (2013) राज्य का अलवर के बाद द्वितीय जिला है।                                (3) भरतपुर(Bharatpur) जिले की प्रमुख नदियां रूपारेल,  गंभीर,  ककुन्द व बाणगंगा यहां की मुख्य नदियांं(Important River) है।                                           
(4) मोती झील(Moti Lake) व केवलादेव झील भरतपुर(Bharatpur) की मुख्य झीलें हैं।
(5) बंधबरैठ व अजान (Ajan)बांध भरतपुर(Bharatpur) के मुख्य बांध है।     
(6) भरतपुर जिले का प्रमुख उद्योग_वनस्पति उद्योग। 

प्रमुख मेले व त्योहार 

(1) बंसती पशु मेला – यह मेला भरतपुर की रूपवास तहसील में मार्ग कृष्णा 15 से सुदी 8 तक भरता है।         (2) गंगा का दशहरा मेला यह मेला भरतपुर की कामां तहसील में ज्येष्ठ शुक्ला 7 से 12 तक लगता है।             (3) बजरंग पशु मेला यह मेला उच्चैन में भरता हैं।         (4) अन्य पशु मेले जैसे जवाहर प्रदर्शनी व ब्रिज यात्रा मेला(डीग) जसवंत पशु(Animal) मेला(भरतपुर), गरुड़ मेला(बंशी पहाङपुर),  ब्रज महोत्सव(डीग/भरतपुर),   भोजन बारी/भोजन की थाली(food plat) परिक्रमा(कामां)।        प्रमुख मंदिर
 (1) गंगा मंदिर इस मंदिर को भरतपुर रियासत के शासक महाराजा बलवंत सिंह ने 1846 ईस्वी में बनवाना शुरू किया था।  यह मंदिर बंसी पहाड़पुर के लाल पत्थरों से निर्मित है।  यह दो मंजिला मंदिर(Temple) 84 खंभों पर टिका हुआ है। 
 इस मंदिर पर मुगल शैली व बोध शैली का प्रभाव प्रतीत होता है।  इस मंदिर में बलवंत सिंह के वंशज महाराज बृजेंद्र सिंह ने गंगा की सुंदर मूर्ति 1937 में प्रतिष्ठित कार्रवाई। मंदिर(Temple) में गंगा मैया(Ganga maiya) के वाहन मगरमच्छ की विशाल(large) मूर्ति भी विराजमान है। 
(2) जामा(Jama) मस्जिद कौमी एकता की दूसरी यादगार इमारत (Emart) जामा मस्जिद है जिसका निर्माण कार्य महाराजा (Maharaja) बलवंत सिंह ने शुरू करवाया। जामा(Jama) मस्जिद का प्रवेश द्वार(Enter Door) फतेहपुर सीकरी के बुलंद दरवाजे(Door) के नक्शे पर बनवाया गया है।  यह मस्जिद लाल (Red) पत्थर की बनी हुई है।   
(3) उषा मंदिर भगवान श्री कृष्ण के पोते अनिरुद्ध की पत्नी के नाम पर कन्नौज के महाराजा महिपाल की रानी चित्रलेखा ने सन 956 में बयाना में उषा मंदिर का निर्माण करवाया था। बाद में मुस्लिम (muslim) आक्रमणकारियों ने इसे ध्वस्त कर उषा(Usha) मस्जिद का रूप दे दिया।                              
(4) अन्य प्रमुख मंदिर लक्ष्मण मंदिर(Laxman Temple),  ढंढार  वाले हनुमान जी का मंदिर।                           
पर्यटन व दर्शनीय स्थल – (1) लोहागढ़ दुर्ग  राजा (Raja) सूरजमल द्वारा निर्मित भीम (bhim) काय दुर्ग जिसके चारों ओर पानी (water) की चौड़ी खाई है।  इसमें सुजान गंगा(Ganga) नहर द्वारा मोती(Moti) झील का पानी आता है।                       
(2) जवाहर बुर्ज  भरतपुर किले(bharatpur fort) के उत्तर पश्चिम पार्श्व में जवाहर बुर्ज वह ऐतिहासिक स्थल है। जहांं से जवाहर सिंह ने दिल्ली पर चढ़ाई के लिए प्रस्थान किया था।  दिल्ली विजय की याद को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए उन्होंने 1765 मेंं किले (Fort) में इसी स्थल पर एक विजय स्तंभ बनवाया था।                      
(3) केवलादेव घना पक्षी अभयारण्य  विश्व प्रसिद्ध अभ्यारण्य  जो साइबेरियन सारस(sarsh) के लिए  प्रसिद्ध है। 1982 में इसे  राष्ट्रीय उद्यान घोषित(Annoush) किया गया।  यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर सूची में 1985 में शामिल किया गया।   (4) भरतपुर संग्रहालय यह लोहागढ़ दुर्ग(lohgad Fort) में कचहरी कला भवन में स्थित है।
 जिसका उद्घाटन 11 नवंबर 1944 को किया गया।
 कचहरी कला भवन महाराजा(Maharaja) बलवंत सिंह के समय(Time) निर्मित किया गया।                  
  (5) बयाना पुराणों में बयाना के निकट(Near) पर्वतीय अंचल को शोणितगिरी तथा बयाना नगर(Nager) को शोणितपुर कहां गया है।  इसका प्राचीन नाम(Name) श्रीपंथ तथा भादानक था। बयाना की ख्याति इसके पास स्थित अनगिनत(Anginat) कब्रगाहों के कारण भी रही है।  अतः इसे कब्रगाहों का शहर भी कहते हैं।       
(6) रूपवास मुगल सम्राट अकबर(Akber) द्वारा बनाए गए फतेहपुर सिकरी के समीप होनेे से रूपवास का क्षेत्र अकबर(Akbar) की आखेट स्थली के रूप में काफी प्रसिद्ध है।  यहां अकबर के मृगया महल दर्शनीय हैं। यहां निकट ही खानवा(Khanwa) की प्रसिद्ध युद्ध स्थली भी स्थित है।   
(7) बयाना दुर्ग यादव राजवंश के महाराजा विजयपाल(Maharaja vijaypal) ने यह दुर्ग (Fort) मनी(दमदमा) पहाड़ी पर 1040 के लगभग बनवाया था। बयाना दुर्ग(Bayana Fort) केे भीतर लाल पत्थरों(Red stone) सेे बनी भीमलाट(Bhimlat) है।  इसे विष्णुवर्धन नेे बनवाया था।  यहां इब्राहिम लोदी(ebrarim lodhi) द्वारा बनाई गई लोदी मीनार(Minar) भी है।  इस दुर्ग को बाणासुर का किला, बादशाह किला व विजयगढ भी कहते हैं। इसी दुर्ग में महाराजा(maharaja) सूरजमल का राज्य अभिषेक हुआ था।                                      
(8) खानवा  गंभीर नदी के शांत तट पर स्थित खानवा भरतपुर से लगभग 32 किमी पूर्व में रूपवास तहसील में है। यहां बाबर एवं मेवाड़ के महाराणा सांगा के मध्य 17 मार्च 1527 को खानवा का युद्ध हुआ था।  जिसमें बाबर की विजय हुई  तथा भारत में मुगल साम्राज्य स्थाई हो गया। यहीं पर बलराम, रेवती तथा चक्रधर दो भुजा वाले विष्णु की विशाल मूर्तियां भी विराजमान हैं।                  (9) डीग डीग भरतपुर की प्राचीन राजधानी(Rajdhani) रहा है। यह कस्बा भव्य जल महलों  के लिए प्रसिद्ध है।  डीग को जल(Water) महलों की नगरी(negar) कहते हैं।  अधिकांश महल(mahal) बंसी पहाड़पुर के बादामी (Bhadhmi) रंग के बलुई पत्थर(stone) से सन 1755 – 1763 के बीच महाराजा(maharaja) सूरजमल एवं जवाहर सिंह द्वारा बनाए गए हैं।                    
(10) वैर  इस कस्बे की स्थापना महाराजा सूरजमल के भाई महाराजा(Maharaja) प्रताप सिंह ने 1726 ईस्वी में की थी।   वैर बाग बगीचों का कस्बा कहलाता है।         (11) कामां काम्यक कदम्ब वन(FORSTE) और कामवन के नाम से पौराणिक ग्रंथों मेंं वर्णित कामां को प्राचीन काल(time) में ब्रह्मपुर  के नाम(name) से संबोधित किया जाताा था। यहां पुष्टिमार्गीय बल्लभ संप्रदाय की दो (two) पीठ स्थापित है। प्रथम गोकुल चंद्र जी एवं द्वितीय मदन (madan) मोहन(mohan) जी का प्रसिद्ध मंदिर।                                                   (12) डीग के अन्य भवन भवन गोपाल(gopal) भवन, सूरज भवन,  हरदेव भवन,  किशन(kishan) भवन, केशव(keshav) भवन,  नंद भवन,  केंद्रीय उद्यान व पुराना महल।                                   
भरतपुर(Bharatpur) के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य                             भरतपुर(Bharatpur) अंचल में प्रदर्शनकारी कलाओं में नौटंकी भूटनी,  हुरंगे,  जिकड़ी और लांगुरिया की प्रधानता। 

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