बाङमेर जिला दर्शन

बाङमेर                                                                         

तेल (oil) एवं प्राकृतिक गैस खनिज (mineral)  संपदा का धनी बाड़मेर जिले के मुख्यालय  ( हेड क्वार्टर ) बाड़मेर का यह नाम बाड़मेर के संस्थापक बाहादा राव  bhahada rav(बाङा RAV) ने रखा ( अर्थात् बाङ का पहाङी किला/ fort ) था । 
कभी मालाणी(malani)  कहे जाने वाला वर्तमान बाड़मेर जिला 1949 में जोधपुर राज्य को राजस्थान में मिलने के बाद स्थापित हुआ था ।  
यह राज्य का क्षेत्रफल की दृष्टि से दूसरा (second)  सबसे बड़ा जिला है। यह थार मरुस्थल का एक भाग (part)  है।
दूर-दूर तक रेत (मिट्टी) के शुष्क टीले यहां की महत्वपूर्ण पहचान है । इस जिले की मांगणियार व लंगा (langa) लोक गायकी ने विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।                                                                                                
 (1)  क्षेत्रफल = 28387 वर्ग किलोमीटर  (km)                                                   
 (2)  क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान का दूसरा (second) सबसे बड़ा जिला बाड़मेर राजस्थान के पश्चिमी भाग में पाकिस्तान (pak)  सीमा पर स्थित है ।                   
(3) बाड़मेर जिले में बहने वाली प्रमुख नदी लूनी (luni)  है।                                   
(4) जिले के पूर्व भाग में सिवाना (sivana)  तहसील में अरावली की छितरी पहाड़ियां है जिन्हें छप्पन (56) के नाम से जाना जाता है ।                                                
(5) बाड़मेर राजस्थान का ऐसा जिला है जो अंतरराज्यीय व अन्तराष्ट्रीय( इंटरनेशनल)  दोनों सीमाएं (line) बनाता है।    
(6)  बाड़मेर की पहाड़ियों में सबसे ऊंची (higest) पहाड़ी हल्देश्वर है  , जो सिवाना में स्थित है । 
              
 (7) बाड़मेर क्षेत्र मुख्य रूप से मारवाड़ के अंतर्गत जोधपुर रियासत का भाग (part to jodhpur) रहा है ।                                                                                                                                                   
  प्रमुख मेले व त्योहार                                   
(a)  मल्लीनाथ पशु मेला    यह मेला बाड़मेर के तिलवाड़ा ( tilvada) स्थान पर भरता है। प्रतिवर्ष (every year) चित्र कृष्णा एकादशी से चित्र शुक्ला एकादशी तक भरता है ।  

 (b) आलम जी का मेला  यह मेला बाड़मेर के धोरीमना क्षेत्र में प्रतिवर्ष (every year)  भादवा सुदी द्वितीय को भरता है। 
                                                      
(c) रणछोड़राय का मेला – यह मेला बाड़मेर के खेड़ क्षेत्र में प्रतिवर्ष राधा (radha)  अष्टमी , माघ पूर्णिमा,  वैशाख पूर्णिमा,  व  श्रावण मास की पूर्णिमा,  व कार्तिक पूर्णिमा को भरता है।   
                                                          
(d)सूईयों का मेला- यह मेला बाड़मेर के क्षेत्र चौहटन में हर 4 वर्ष में पोष  माह  की अमावस्या (अमावस) को भरता है।    
                                            
(e)अन्य मेले- सावन (savan) का मेला(सिवाना), जोगमाया (jogamaya)  का मेला(चालकन),   हल्देश्वर महादेव (shiv)  का मेला(पीपलूद),   रानी भटियानी का मेला (जसोल),  बजरंग पशु मेला (सिणधारी),  नाकोङा जी का मेला(नाकोङा ),  वीर तारा माता जी (veertara mata ji) का मेला(वीरतारा),   थार महोत्सव / डेजर्ट फेस्टिवल (बाङमेर) ।                                                                                                                           
  प्रमुख मंदिर (temple) 
                             
(1) श्री रणछोड़ राय (ray)  जी का मंदिर यह प्रमुख वैष्णव तीर्थ एवं हिंदुओं (hindu)  का पवित्र धाम है। जो लूनी नदी (luni)  के किनारे स्थित है। खेड़ में भूरिया (bhuriya)  बाबा तथा खोङिया  बाबा रेबारियों के आराध्य देव हैं।  यहां पंचमुखी महादेव मंदिर,  खोङिया हनुमान मंदिर (temple)  है। 
                              
(2) मल्लीनाथ मंदिर  तिलवाड़ा में मलीनाथजी (malinatji)  का समाधि स्थल है। यहां उनका प्रसिद्ध मंदिर है। 
          
(3) ब्रह्मा जी का मंदिर  आसोतरा (aasotra)  बाड़मेर में ब्रह्मा जी का मंदिर स्थित है।  इस मंदिर की मूर्ति स्थापना 1984 ईस्वी में की गई।  इसे सिद्ध पुरुष खेताराम जी (khetaramji)  महाराज ने बनवाया।  
                                  
(4) श्री नाकोडा जी का मंदिर बालोतरा के पश्चिम में भाकरियां (bhakriya)  नामक पहाड़ी पर जैन समुदाय का प्रसिद्ध तीर्थ  (tirth) स्थान नाकोड़ा है। जिसे मेवानगर के जैन तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है। मुख्य मंदिर में 23 वे  जैन तीर्थकार भगवान (goad)  पार्श्वनाथ की प्रतिमा विराजित है।  
            
(5) किराडू के मंदिर किराडू प्राचीन काल (oldest age) में परमार शासकों की राजधानी(capital)  किरात कूप के नाम से प्रसिद्ध था। बाड़मेर के हाथमा (hathma)   गांव के निकट एक पहाड़ी के नीचे स्थित किराडू 10 वीं व  11 वीं सदी के विष्णु व शिव मंदिरों (shiv temples)  के लिए प्रसिद्ध है।  यहां सर्व प्रसिद्ध सोमेश्वर मंदिर (somesaver) है। यह किराडू का सबसे प्रमुख एवं सबसे बड़ा मंदिर (big temple)  है।  किराडू की स्थापत्य कला भारतीय नागर शैली (indian nagar saili)  की है। सोमेश्वर मंदिर नागर (nagar)  शैली के मंदिर की परंपरा में शिव मंदिरों की श्रेणी में महामारु गुर्जर शैली की एक उच्च कोटि की बनावट है।  किराडू के मंदिरों (temples) के पास पहाड़ी पर महिषासुर मर्दिनी की त्रिपाद मूर्ति है। किराडू में मिथुन (mithun) मूर्तियों की भव्यता के कारण इसे राजस्थान (raj.)  का खजुराहो की संज्ञा दी गई है। 

(6) अन्य प्रमुख मंदिर आलम जी का मंदिर, नागणेची माता(mata)का मंदिर, वीरातरा (veertara)  का मंदिर।  
                                                         
पर्यटन व दर्शनीय स्थल 
                        
(अ) सिवाना दुर्ग (sivana fort)  छप्पन की पहाड़ियों में पंवार शाासक वीर नारायण (veer narayan)  द्वारा विक्रम संवत 1100 लगभग निर्मित है।  बाद में इस पर नाडोल (nadol) केे चौहानों का अधिकार हो गया। 
     
(ब) गडरा(gadra)  का शहीद स्मारक  1965 के भारत-पाक (ind. – pak.)  युद्ध में शहीद हुए 14 रेलवे कर्मचारियों  की  स्मृति में  निर्मित स्मारक जहां प्रतिवर्ष (every year)  9 सितंबर को उत्तरी रेलवे मुख्य यूनियन (railway union)  की तरफ से एक भव्य मेले का आयोजन होता है।
       
(स) बाटाडू का कुआ  इसे रेगिस्तान (डेजर्ट) का जल महल के नाम सेे जाना जाता हैं।  यह कुआं संगमरमर (sangmarmar) का बना हुआ है। यह कुआं बायतु (bayatu)  पंचायत समिति में स्थित है। 
        
अन्य प्रमुख स्थल  कोटडा(kotra)दुर्ग,जूना दुर्ग(juna fort) ,उण्डूकासमेर, वाकल माता (vakal mata) का मंदिर,सफेद अखाड़ा। 

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