बांसवाङा(100 द्वीपों (टापू) का शहर/नगर ) जिला दर्शन

बांसवाड़ा जिला ( सौ (100) द्वीपों का शहर )       


         महत्वपूर्ण तथ्य                                                       *   बांसवाड़ा जिले का कुल क्षेत्रफल = 5037 k. M

 जनसंख्या   (2011)  1798194
बांसवाड़ा जिले का संभागीय मुख्यालय उदयपुर

2. भौगोलिक तथ्य (fact) 

🌠बांसवाड़ा राजस्थान के दक्षिण में स्थित है। 
 🌠बांसवाड़ा गुजरात व  एमपी(mp)  की सीमा (sima) के निकट स्थित है।

* बासंवाडा जिला राजस्थान के दक्षिणी भाग (south part) मे गुजरात/मध्य प्रदेश (m. P)  की सीमा से लगता हुआ जिला है। इसे राजस्थान (Raj.)  का चेरापूंजी (cerapunji)  भी कहा जाता है।

* बांस (bans) के वनों की अधिकता के कारण इसका नाम बांसवाड़ा पड़ा।

  🌠 बांसवाड़ा के प्रमुख कस्बे कुशलगढ़ (kushalgr) , परतापुर, बागीदौरा, घाटोल, अरथुना ।बांसवाड़ा जिला जनजाति बहुल हैं।                                                                                                                                                         🌠     प्रमुख मंदिर   🌠
                                                           
 🌠   1* घोटिया अंबा  (ghotiya anba)   यहां अंबा माता के अलावा  घोटेश्वर महादेव पांडव कुंड और केला पानी पवित्र तीर्थ है। घोटिया अंबा से कुछ किलोमीटर दूर भीमकुंड है , जो सुरंग द्वारा घोटिया अंबा से जुड़ा है। भीमकुंड से कुछ दूरी पर रामकुंड है, जिसे फाती खान(fati khan)  भी कहा जाता है।                                           

  🌠  2  * घूणी के रणछोङरायजी  यह महाभारत कालीन तीर्थ (tirt) माना जाताा है  । यहां भगवान रणछोड़राय की प्रतिमा है।  इन्हें हर मनोकामना पूर्ण करने वाला व फसलों के रक्षक देव (dev) के रूप में पूजा जाता है । प्रतिवर्ष (every year)  फाल्गुन शुक्ला एकादशी (11) (आंवला एकादशी )  को यहां मेला भरता है।                           

  🌠 3  *  छिंछ (chich) ( बांसवाङा)    यहां विक्रम की 12वीं सदी का ब्रह्मा जी का मंदिर है जिसमें ब्राह्मा जी आदम काव्य चतुर्मुखी मूर्ति है तथा अंबालिया तालाब (pond) की पाल पर छिंछा माता(mata)  का मंदिर है।                                                                       

🌠   4 * आर्थूणा के मंदिर यह मंदिर वागड़ के परमार राजाओं(paramar raja)  द्वारा निर्मित है। उस समय अर्थुणा परमारों की राजधानी थी । प्राचीन ग्रंथों में इसका नाम उत्थूनक मिलता है ।  मंडलेश्वर महादेव मंदिर(mahadev mandir)  जो सप्तायतन शैली में बना हुआ है। सोमनाथ का मंदिर (somnat)   , नीलकंठ महादेव का मंदिर  ,  कनफटे साधुओं का मंदिर, कुंभेश्वर मंदिर , गदाधर का मंदिर।                     

🌠   5  * त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (tripura sundri)  तलवाड़ा से 5 किमी दूर स्थित त्रिपुर सुंदरी (उमराई गांव) का मंदिर स्थानीय लोगों में तुरताई माता (turtai mata)  के नाम से जाना जाता है।                                                 अन्य मंदिर सूर्य मंदिर,  नंदिनी माता तीर्थ(tirt) , लक्ष्मी नारायण का मंदिर,  विट्ठल देव का मंदिर, कालिंजरा मंदिर।                    

🌠 6   पर्यटन तथा दर्शनीय स्थल                                               माही बांध माही नदी (mahi rever)  पर निर्मित माही बजाज सागर बांध  , जिसने बांसवाड़ा क्षेत्र का कायापलट कर दिया।                 

    केला पानी  (kela pani) महाभारत कालीन पांडूवो के वनवास काल की शरण स्थली।                                                             
   कागदी पिकप यह कागदी झील (kagdi lake) के किनारे स्थित है। यह माही बजाज सागर(bajaj sagar)  परियोजना का हिस्सा है।                            

   अन्य स्थल अब्दुल्लाह पीर की दरगाह,  बाई तालाब (bai talab) , डाईलाब झील  , मानगढ़ धाम   , कुशलबाग महल, राजराजेश्वर का मंदिर,  गोविंद गुरु स्मृति उद्यान , समाई माता का मंदिर (samai mata mandir) ।                                                               

     प्रमुख मेले और त्योहार कल्लाजी  का मेला(kalla ji ka mela)  , घोटिया अंबा का मेला,  मानगढ़ धाम (dham)  का मेला ( आदिवासियों का मेला) , गोपेश्वर का मेला। 

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