आसियान की स्थापना क्यों हुई ? प्रकृति एवं उद्देश्य

दक्षिणी एशियाई राष्ट्र संघ(आसियान ) की स्थापना   इस संगठन की स्थापना 8 अगस्त 1947 को हुई।

 इसके सदस्य देशों में थाईलैंड म्यांमार इंडोनेशिया ब्रुनेई लाओस   मलेशिया कम्पूचिया सिंगापुर(singapur)  वियतनाम(viyatname)  फिलीपींस शामिल हैं ।

ये सब   दक्षिण पूर्व एशियाई (ashiyai)  देश है।   दक्षिण पूर्व एशिया सामरिक और भौगोलिक (geographlycal)  दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण (important)  है। द्वितीय (secose)  विश्व युद्ध (world battle)  के पश्चात तत्कालीन विश्व शक्ति (world power)  ब्रिटेन की शक्ति के  पराभव के बाद यह क्षेत्र शून्य  हो गया एवं चीन (cheen)  इस शून्यता को भरने का प्रयास करने लगा । चीन की विस्तार वादी नीति (योजना) के कारण दक्षिण पूर्व एशिया के सभी छोटे बड़े देश (small and big country) चीन के प्रति आशंकित रहने लगे। 1949 ई. मैं चीन मैं साम्यवादी (samyavadi)  शासन की स्थापना हुई। जिसका प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष प्रभाव इस क्षेत्र  पर पड़ा । इन जैसों ने चीन की बढ़ती हुई विस्तार वादी तथा साम्राज्यवादी नीति (niti)  के विरुद्ध  तटस्थता का मार्ग (रास्ता)  अपनाते हुए आपसी सहायता पर बल दिया । अन्ततः परस्पर आर्थिक सहयोग को गति प्रदान  करने के लिए इन्होंने आसियान (aasiyan) अर्थात दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (union)  नामक संगठन (organisation) की स्थापना की।  

                                                      
    आसियान की प्रगति एवं  उद्देश्य (aim)       आसियान पूर्णता आर्थिक सहयोग (economic help) पर आधारित 10 (ten) दक्षिणी पूर्वी एशियाई राज्यों का एक संगठन है। इन देशों की औपनिवेशिक विरासत ऐतिहासिक व भौगोलिक पृष्ठभूमि राजनीतिक  (political) आर्थिक (economic)   व सामाजिक जीवन (life)  मूल्य मैं भी  अंतर पाया जाता है नौतियों का सामूहिक मुकाबला करने के लिए यह संगठन अस्तित्व मैं आया। 
इन देशों के समक्ष बढ़ती हुई जनसंख्या गरीबी (poor)आर्थिक शोषण   असुरक्षा आंतकवाद ग्लोबल वार्मिंग (तापमान) आदि की एक समान चुनौतियां है जिनका निवारण परस्पर क्षेत्रीय संयोग से ही संभव है।   आसियान के निर्माण का मुख्य उद्देश्य (aim)  दक्षिण पूर्व एशिया में आर्थिक विकास को गति प्रदान करना एवं सदस्य (members)  देशों में राजनीतिक सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक व्यापारिक वैज्ञानिक तकनीकी पर्यावरण (environment) प्रशासनिक नैतिक आदि क्षेत्रों में परस्पर सहयोग (help)  करना तथा विभिन्न सांझी समस्याओं का एकता के साथ समाधान ढूंढना ही इस संगठन का मुख्य उद्देश्य  है। इस संगठन का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य (important target)  साझा  (मिलजुलकर)  बाजार तैयार करना एवं इन देशों के मध्य व्यापार को बढ़ावा देना कथा इनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना । प्रति व्यक्ति (प्रति आदमी)  आय (income)में बढ़ोतरी करना भी इस संगठन का मुख्य उद्देश्य है।  

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